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दरभंगा में रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन, SC/ST थाने के अवर निरीक्षक कृष्णदेव मरांडी निलंबित, PhonePe लेनदेन का ऑडियो वायरल

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दरभंगा में SC/ST थाना के अवर निरीक्षक कृष्णदेव मरांडी को रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित कर दिया गया। फोन-पे लेनदेन का ऑडियो वायरल होने के बाद एसएसपी ने सख्त कार्रवाई की।

दरभंगा/आलम की खबर:दरभंगा जिले में पुलिस विभाग के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। SC/ST थाना में पदस्थापित अवर निरीक्षक कृष्णदेव मरांडी को रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में निलंबित कर दिया गया है। उन पर कांड संख्या 94/25 के वादी छेदी पासवान से मामले को निपटाने के नाम पर अवैध रूप से पैसे लेने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और विभागीय स्तर पर जवाबदेही को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब कथित लेनदेन से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल ऑडियो में वादी और अवर निरीक्षक के बीच बातचीत होने का दावा किया गया, जिसमें पैसे के लेनदेन और केस से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा की बात सामने आई। जैसे ही यह ऑडियो सार्वजनिक हुआ, मामले ने तूल पकड़ लिया और इसकी शिकायत सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंच गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Jagunath Reddy ने तुरंत संज्ञान लिया और SC/ST थाना प्रभारी को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में वायरल ऑडियो की तकनीकी और आवाज आधारित पुष्टि की गई। जांच रिपोर्ट में यह कहा गया कि ऑडियो में अवर निरीक्षक कृष्णदेव मरांडी की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है और उसमें पैसों के लेनदेन से जुड़ी बातचीत के संकेत मिलते हैं।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद थाना स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई, जिसे आगे बढ़ाते हुए एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से अवर निरीक्षक को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला SC/ST थाना कांड संख्या 94/25 से जुड़ा हुआ है, जिसमें वादी छेदी पासवान द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि इसी केस को निपटाने या प्रभावित करने के नाम पर पैसों की मांग की गई थी और लेनदेन फोन-पे जैसे डिजिटल माध्यम से किए जाने की बात सामने आई है। डिजिटल पेमेंट के इस पहलू ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है क्योंकि इससे कथित भ्रष्टाचार का डिजिटल ट्रेल भी सामने आ सकता है।

निलंबन के बाद अवर निरीक्षक कृष्णदेव मरांडी का मुख्यालय पुलिस लाइन दरभंगा निर्धारित किया गया है, जहां वे विभागीय जांच पूरी होने तक रहेंगे। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच विस्तृत स्तर पर की जाएगी और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब दरभंगा पुलिस प्रशासन पहले से ही भ्रष्टाचार और अनुशासन को लेकर लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही पैसे के लेनदेन और शिकायतों से जुड़े मामलों में कई स्तर पर विभागीय कार्रवाई देखने को मिली है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे पुलिस विभाग की सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि ऐसे मामलों की समय पर रोकथाम जरूरी है ताकि जनता का विश्वास पुलिस व्यवस्था पर बना रहे।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीनी स्तर पर शिकायत निपटारे की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के बावजूद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका है या नहीं।

फिलहाल, दरभंगा पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि जांच पूरी होने के बाद और भी कार्रवाई संभव है। विभाग का कहना है कि कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि को किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

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